Posts

' शनि देव '

शनि देव जिन्हे न्याय का देवता भी कहा जाता है, एक ऐसे देवता है जिनका नाम सुनते ही माथे पर चिंता की लकीरें छा जाती है, मन घबरा जाता है आशंका के बदल छाने लग जाते है कि कही उनकी कुदृष्टि तो नहीं पड़ने वाली है।   शनि देव पर बात करने से पहले उनके बारे में थोड़ा जान लेते है।  वैसे तो शनि देव के जन्म के बारे में कही कहानियाँ है किन्तु पुराणों और ग्रंथों के अनुसार सबसे प्रचलित कहानी के रूप में यह कहानी है कि  राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ। सूर्यदेवता का तेज बहुत अधिक होने के कारण संज्ञा के लिए उसे झेल पाना मुश्किल हो रहा था । वह सोचा करती कि किसी तरह के जतन या तपादि से सूर्यदेव की अग्नि को कम करना होगा।  जैसे तैसे दिन बीतते गये संज्ञा के गर्भ से वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना तीन संतानों ने जन्म लिया। संज्ञा अब भी सूर्यदेव के तेज से घबराती थी फिर एक दिन उन्होंने निर्णय लिया कि वे तपस्या कर सूर्यदेव के तेज को कम करेंगी लेकिन बच्चों के पालन और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे इसके लिये उन्होंने एक युक्ति निकाली उन्होंने अपने तप से अपनी हमशक्ल को पैदा किया जिसका नाम संवर्णा

प्रकृति और मनुष्य संवाद विश्व पर्यावरण दिवस विशेष - World Environment day special (5th Jun)

Image
credit: www.selfstudymantra.com & google images एक बहुत अमीर व्यक्ति जो की बहुत बड़ा उद्योगपति है, जिसका बिज़नेस एम्पायर विश्वभर में फैला हुआ है , एक हाथ में शराब का गिलास और एक हाथ में सिगरेट लिए अपने ऑफिस की छत पर अपने कुछ एम्प्लाइज के साथ अपने बिज़नेस को लेकर चर्चा कर रहा होता है, चर्चा इस विषय पर होती है की लॉकडाउन के कारण उनके बिज़नेस एम्पायर की किन-किन कंपनियों में कितना घाटा हुआ और किनमें मुनाफा I मौसम का स्वाभाव उग्र लग रहा था, बिजली कड़क रही थी और तेज हवा भी चल रही थी, लग रहा था कोई तूफ़ान दस्तक दे रहा है I    चर्चा थोड़ी देर तक चली फिर उस व्यक्ति को छोड़ उसके सभी एम्प्लाइज नीचे चले गए, और वह व्यक्ति अपनी ड्रिंक और सिगरेट का आनंद लेता रहा तभी उसके मोबाइल पर रिंग बजी और वह ड्रिंक के गिलास को छत की मुंडेर पर रखकर मोबाइल पर बात करने लगा, तेज हवा अभी भी बह रही थी, मोबाइल पर बात ख़त्म होते ही वह गिलास की तरफ बड़ा, तभी एक बहुत तेज हवा का झोका आया और मुंडेर पर रखा ड्रिंक का गिलास नीचे गिर गया, उस व्यक्ति ने नीचे गिरे गिलास को देखा और कुछ क्षण तक देखता रहा, फिर उसने आसमान

' विश्व तम्बाकू निषेध दिवस/Anti-Tobacco Day/No Tobacco Day 2020 ' 31 मई

Image
तम्बाकू निषेध दिवस 2020  विश्व स्वास्थ्य संगठन  द्वारा आयोजित  विश्व तम्बाकू निषेध दिवस    प्रत्येक वर्ष   31 मई  को  पुरे विश्व में लोगो को तम्बाकू और उसके उपभोग से होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से  मनाया जाता है, और लगता है की ऐसे ही हर साल आगे आने वाले कई  वर्षों में भी मनाया जाता रहेगा, क्योंकि हर साल इसके शिकार हुए लोगों की संख्या कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है I  साल 2020 के लिए इस दिवस की थीम है ' नौजवानों को तम्बाकू उद्योग के हथकंडों से बचाना और उन्हें तम्बाकू और निकोटिन के उपभोग से रोकना'  I   तम्बाकू उन चुनिंदा  वस्तुओं में से है जो अभिशाप बनकर हमारे समस्त समाज की जड़ो को खोखला कर रही है, उसे निगल रही है I विश्व तम्बाकू निषेध दिवस     तम्बाकू का  इतिहास (तम्बाकू का इतिहास ) तम्बाकू का सर्व प्रथम चलन लगभग 5000 ई. पू. से भी पहले  दक्षिण अमेरिका में हुआ करता था, तब इसका उपयोग धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाता था जिसका सुगन्धित धुएँ के तौर पर उपयोग किया जाता था, घाव को भरने, दांतों के

पेट घटाने के आयुर्वेदिक उपचार

Image
             दुनिया में जो लोग किसी ना किसी कारण से दुखी है उनमे से एक कारण उनका अपना मोटापा भी है,  पेट की अतिरिक्त चर्बी और थुलथुलेपन को ही मोटापा कहते है,  आजकल की बेढंगी लाइफ स्टाइल ने मोटोपे को घर-घर पंहुचा दिया है,  बाहर के खाने पर अत्यधिक निर्भरता ने भी इसे बढ़ावा दिया है I मोटापा न सिर्फ आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक छाप छोड़ता है, बल्कि यह कई बिमारियों से आपका नाता भी जोड़ देता है ।  आजकल लोग अपने लुक्स को लेकर काफी सजग रहते है, इसके लिये तरह तरह के डाइट प्लान भी अपनाते है और जिम में पसीना भी बहाते है, और इसके लिए अच्छा खासा समय और पैसा भी खर्च करते है लेकिन ऐसा कर पाना सबके बस की बात नहीं होती कुछ के पास समय होता है तो पैसा नहीं होता और कुछ के पास पैसा होता है तो समय नहीं, इसलिए कई लोगों के लिए मोटापा दूर करना या पेट घटाना दूर की कोढ़ी लगता है I इस लेख में आप जानेगें की आयुर्वेदिक तरीकों और घरेलु नुस्ख़ों की मदद से पेट की चर्बी को कैसे शीघ्रता और सकारात्मक रूप से घटाया जा सकता है I सबसे पहले मोटापे के कारणों पर दृष्टि डालते है कि वह कौन-कौन से कारक हैं जो पेट

''तुलसी के चमत्कारी गुण'' भाग-4

Image
बच्चो के रोग और तुलसी के उपयोग        छोटे  बच्चों के रोगों में तुलसी बहुत सौम्य और निरापद औषधि के रूप में व्यवहार की जाती है, इससे बच्चों के ज्वर, खांसी, दूध पलटना, श्वांस आदि रोगों में हितकारी है I (1)   बच्चों को शीतला निकलने   पर तुलसी की मंजरी, अजवाइन, और अदरक समभाग लेकर दिन में कई बार सेवन कराने से लाभ होता है I (2)   तुलसी पत्र एक 10 ग्राम, मैथी 10 ग्राम, कूट 6 ग्राम आधा पाव जल में पकायें I जब चौथाई भाग बच जाए तो छानकर,  ठंडा करके पिलाए, यह शीतला ज्वर में हितकारी है I (3)   बच्चों को सर्दी और खांसी की शिकायत होने पर तुलसी पत्र का रस अजवाइन और अदरक का रस 7-8 ग्राम लेकर पीस लें और लगभग २६ ग्राम शहद मिलाकर शीशी में भर लें I इसमें से 30-40 बूँद दिन में तीन बार देने से लाभ होता है I (4)   तुलसी पत्र, बबूल की कोंपल, अजवाइन 10-10  ग्राम मिलाकर रख लें, इसे लगभग 5 ग्राम जल में पकाए, जब चौथाई रह जाए तो छानकर बच्चों को पिलाए, इससे सब प्रकार के ज्वरों में लाभ होता है I (5)   बच्चों का पेट फूलने पर तुलसी का स्वरस अवस्थानुसार 2 ग्राम लगभग तक पिलाने से आराम होता

''तुलसी के चमत्कारी गुण'' भाग-3

Image
तुलसी का आँख, नाक और कानो के रोग में लाभ          मनुष्य शरीर में यह तीनों इन्द्रियां बहुत महतवपूर्ण है और तीनों ही बहुत कोमल भी होती है I इसलिए इनकी किसी भी व्याधि में एकाएक तीव्र औषधि  व्यवहार करना उचित नहीं है I तुलसी अत्यधिक सौम्य औषधि है जो अपने सूक्ष्म प्रभाव से इन अंगों को शीघ्र निरोगी कर सकती है I इस सम्बन्ध में ' चरक सहिंता ' का निम्न वचन विशेष महत्वपूर्ण है - गोरवे शिरसे शूले पीनसे अर्धभेदके I क्रिमी व्याधावपस्मारे घ्राणनाशे प्रपोहके II अर्थात ' तुलसी का प्रयोग मस्तक में एकत्रित दोषों को दूर करके सिर का भारीपन, मस्तक शूल, पीनस, आधा सीसी, कृमि, मृगी, सूँघने की शक्ति नष्ट होने आदि को ठीक कर देता है I (1)   तुलसी के बीज लगभग २ ग्राम, २ ग्राम रसौत, आमा हल्दी २ ग्राम और अफीम लगभग आधा ग्राम, इन सबको घीग्वार के गूदे में मिलाकर पीस लें I इसका आँखों के चारों और लेप करने से दर्द और सुर्खी में लाभ प्राप्त होता है I (2)   केवल तुलसी का रस निकाल कर आँखों में डालने से भी नेत्रों की पीड़ा तथा अन्य रोग दूर होते हैं I यदि तुलसी के रस में थोड़ा असली शहद

''तुलसी के चमत्कारी गुण'' भाग-2

तुलसी और ज्वर (बुखार)         हमारे देश के कई भागो में वर्षा ऋतू में मच्छरों के काटने से फैलने वाले रोग मलेरिया,डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप विशेष रूप से पाया जाता है I तुलसी के पौधों में मच्छरों को दूर भगाने का गुण है, उसकी पत्तियों का सेवन करने से मलेरिया का दूषित तत्व दूर  हो जाता है, इसलिए ज्वर आने पर तुलसी और कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर पी लेना सबसे आम उपचार का चलन है I    ज्वर को   दूर करने के लिए वैद्यक ग्रंथो में कुछ नुस्खे दिए है जो इस प्रकार है :- (1)   जुकाम के कारण आने वाले ज्वर में तुलसी के पत्तो का रास मिलाकर सेवन करना चाहिए I (2)   तुलसी के हरे पत्ते 50 ग्राम और कालीमिर्च 25 ग्राम एक साथ मिलकर बारीक पीसकर छोटी-छोटी झरबेरी बराबर गोलियां बनाकर छांया में सूखा ले, इनमे से दो गोलियां तीन-तीन घंटे के अंतराल में जल के साथ लेने से मलेरिया में लाभ प्राप्त होता I (3)   तुलसी और पुदीना के पत्तों का 10-10 ग्राम रास लेकर उसमे १ ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करने से बुखार में आराम मिलता है I (4)   शीत ज्वर में तुलसी पुदीना और अदरक तीनो को ०५-०५ ग्राम मिलकर काढ़ा बनाकर